संविलियन से पहले शासकीय सेवक नहीं माने जाएंगे, 2017 का क्रमोन्नति सर्कुलर लागू नहीं|
- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सोमवार को 1188 सहायक शिक्षकों और पूर्व शिक्षाकर्मियों को बड़ा झटका देते हुए उनकी सभी याचिकाएँ खारिज कर दी हैं।
- जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने स्पष्ट कहा कि—
➡️ 30 जून 2018 से पहले ये सभी शिक्षक पंचायतकर्मी थे।
➡️ उस अवधि में इन्हें शासकीय सेवक नहीं माना जा सकता।
➡️ इसलिए 2017 के क्रमोन्नति सर्कुलर का लाभ देने का कोई आधार नहीं है।
पृष्ठभूमि: संविलियन से पहले कौन थे ये शिक्षक?
इन सभी शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षाकर्मी ग्रेड–3, ग्रेड–2 और ग्रेड–1 के रूप में पंचायत राज अधिनियम, 1993 के तहत पंचायतों में हुई थी।
इस दौरान—
- उनकी सेवा व नियंत्रण जनपद पंचायत के अधीन था
- वे राज्य शासन के नियमित सरकारी सेवक की श्रेणी में नहीं आते थे
- संविलियन 1 जुलाई 2018 से लागू हुआ
संविलियन के बाद इन पदों को नया पदनाम दिया गया—
- सहायक शिक्षक (एलबी)
- शिक्षक (एलबी)
- व्याख्याता (एलबी)
हाई कोर्ट का मुख्य तर्क:-
कोर्ट ने कहा कि क्रमोन्नति (ACP/Time scale) के लिए 10 वर्ष की अनिवार्य सेवा की गणना 1 जुलाई 2018 से ही की जा सकती है, क्योंकि:
- संविलियन से पहले वे “सरकारी सेवक” नहीं थे
- 2017 का क्रमोन्नति सर्कुलर केवल राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों पर लागू था
- इसलिए 10 वर्ष की आवश्यक योग्यता ये शिक्षक अभी पूरी नहीं करते
इस आधार पर कोर्ट ने सभी याचिकाएँ खारिज कर दीं।
शिक्षकों का पक्ष क्या था?
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि—
- उन्होंने 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है
- इसलिए 2017 वाले आदेश के अनुसार उन्हें क्रमोन्नति/वेतन वृद्धि मिलनी चाहिए
- “सोना साह” केस के डिवीजन बेंच के फैसले का हवाला देते हुए लाभ देने की मांग की गई थी
लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह मामला अलग है और सोना साह केस के नियम इन शिक्षकों पर लागू नहीं होते।
निष्कर्ष:-
हाई कोर्ट के इस निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि —
पंचायत में सेवा अवधि को संविलियन से पहले सरकारी सेवा नहीं माना जाएगा और क्रमोन्नति की पात्रता की गणना केवल 1 जुलाई 2018 के बाद की सेवा से ही होगी।